मनीषियों को जन्म देने वाली स्त्री हीन कैसे : जसबीर सिंह

अधिवेशन को सम्बोधित करती राष्ट्रीय समिति की नूरजहां सफिया नियाज, साथ में हैं संगठन की प्रदेश संयोजक निशात हुसैन और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की जकिया सोमन

मुस्लिम फैमिली लॉ को कलमबद्ध करने की मांग को लेकर मुस्लिम महिलाओं का अधिवेशन

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अधिवेशन को सम्बोधित करती राष्ट्रीय समिति की नूरजहां सफिया नियाज, साथ में हैं राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की जकिया सोमन

जयपुर। भारतीय मुस्लिम महिला आन्दोलन की ओर से जयपुर में मुस्लिम परिवार कानून को कलमबद्ध करने की मांग को लेकर 11वें वार्षिक अधिवेशन का आयोजन किया गया। अधिवेशन के मुख्य अतिथि अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सरदार जसबीर सिंह थे। अध्यक्षता संगठन की प्रदेश संयोजक निशात हुसैन ने की। इस आयोजन में राजस्थान सहित ओडिशा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडू, तेलंगाना, केरल, दिल्ली, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और पश्चिम बंगाल की मुस्लिम महिलाओं और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की।

इस आयोजन में मुस्लिम महिलाओं और अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की

संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की जकिया सोमन ने इस अवसर पर कहा कि मुस्लिम समाज में निकाह के लिए लड़की की उम्र 18 और लड़के की 21 साल होनी चाहिए। इससे पहले निकाह गैरकानूनी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश का कानून मुस्लिम समाज पर भी लागू होता है और संविधान में मिले अधिकार उनको भी हासिल हैं। उन्होंने हलाला और बहुविवाह को गैरकानूनी करार देते हुए इसे समाप्त किये जाने की बात पर बल दिया।

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राष्ट्रीय समिति की नूरजहां सफिया नियाज ने कहा कि तीन तलाक मामले में सुप्रीम कोर्ट निर्णय दे चुका है, लेकिन फिर भी इसकी क्रियान्विति और सुधार के लिए किसी भी विवाद की स्थिति में पहले पति-पत्नी को आपस में बैठकर बात करनी चाहिए, उसके बाद परिवार और समाज के लोगों को मध्यस्थता करनी चाहिए। उन्होंने मेहर की रकम का जिक्र करते हुए कहा कि लड़के की सालाना आय निकाह के समय ही लड़की को मेहर के रूप में मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी।

अधिवेशन के मुख्य अतिथि अल्पसंख्यक आयोग के चेयरमैन सरदार जसबीर सिंह और संगठन की प्रदेश संयोजक निशात हुसैन

मुख्य अतिथि सरदार जसबीर सिंह ने संगठन की मांगों को जायज ठहराते हुए कहा कि किसी भी समाज का वजूद महिलाओं के बिना संभव नहीं। सिंह ने कहा कि जब हमारे देश में 13वीं-14वीं शताब्दी में सभी समाज की महिलाएं सती प्रथा, दहेज प्रथा और पर्दा प्रथा से अभिशप्त थी और महिलाओं का जीना दुश्वार हो गया था उस समय सिख पंत के गुरू नानकदेव ने अपनी वाणी में कहा, जो गुरू ग्रंथ साहब में भी दर्ज है, कि उस नारी को हीन कैसे कह सकते हैं जो राजा-महाराजा और मनीशियों को जन्म देती है। अगर देखा जाए तो ईश्वर को भी जब अवतार के लिए इस धरती पर आना पड़ा तो उन्हें भी स्त्री की कोख का सहारा लेना पड़ा।

संगठन की प्रदेश संयोजक निशात हुसैन, राष्ट्रीय समिति की नूरजहां सफिया नियाज और राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की जकिया सोमन

संगठन की प्रदेश संयोजक निशात हुसैन ने मुस्लिम परिवार कानून को कलमबद्ध किये जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कुरान की आयतों के अनुसार महिलाओं को मिले अधिकारों को पाने के लिए भारतीय संविधान के अनुसार हम अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं। जब मुस्लिम पर्सनल लाॅ की बात की जाती है और हम किसी कोर्ट में जाते हैं तो वहां कहा जाता है कि पर्सनल लाॅ में तो यह लिखा है। इसीलिए हम चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए कोई कलमबद्ध कानून बने जिसकी धाराओं को लेकर हम अपनी पीड़ा, तकलीफ और गुहार लेकर कोर्ट जा सकें और अपनी लड़ाई लड़ सकें।

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