वो कलाफरोशों का और ये अदीबों का साहित्य उत्सव: रणवीर सिंह

लिटलेचर फेस्टीवल की तर्ज पर ‘‘समानान्तर साहित्य उत्सव’’ का आयोजन

प्रलेस जयपुर में 27 जनवरी से आयोजित करेगा तीन दिवसीय ‘‘समानान्तर साहित्य उत्सव’’

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जयपुर। जयपुर में बाजारीकरण से प्रभावित फेशन परेड की तर्ज पर आयोजित होने वाले एक बड़े साहित्य उत्सव में अंग्रेजी साहित्य के बढ़ते वर्चस्व को देखते हुए राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ भारतीय भाषाओं और उससे जुड़े साहित्यकारों को आगे लाने के लिए जयपुर लिटलेचर फेस्टीवल की तर्ज पर आगामी 27 जनवरी से तीन दिवसीय ‘‘समानान्तर साहित्य उत्सव’’ का आयोजन करने जा रहा है। जनपथ स्थित यूथ हाॅस्टल में आयोजित होने वाले इस समानान्तर साहित्य उत्सव में केदारनाथ सिंह, नरेश सक्सेना, विष्णु खरे, सुरजीत पातर, मंगलेश डबराल, मैत्रेयी पुष्पा, लीलीधर मंडलोई, मनीषा कुलश्रेष्ठ जैसे देष के अनेक नामचीन साहित्यकार शिरकत करेंगे।
प्रलेस के महासचिव एवं इस समारोह के मुख्य समन्वयक ईशमधु तलवार ने यहां आयोजित प्रेस वार्ता में बताया कि साहित्य के नाम पर दुनियाभर में जो लिट फेस्ट कल्चर विकसित किया जा रहा है वह वास्तव में साहित्य और कला को मनोरंजन के बाजार में बदलने का काम कर रहा है। जिस तरह से साहित्य के नाम पर उत्सव आयोजित किये जा रहे हैं, वे दरअसल अपसंस्कृति के उत्सव हैं। साहित्यकारों के नाम पर गैर साहित्यकारों, अभिनेताओं, सेलिब्स, मसखरों, अवसरवादियों और व्यापारियों को लेखक और बुद्धिजीवियों की तरह पेश किया जा रहा है।

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ आगामी 27 जनवरी से तीन दिवसीय ‘‘समानान्तर साहित्य उत्सव’’ का आयोजन करने जा रहा है।

इस अवसर पर इंडियन पीपुल्स थियेटर एसोसिएशन (इप्टा) के अध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी रणवीर सिंह ने जयपुर लिटलेचर फेस्टीवल का नाम लिए बगैर उसे कलाफरोशों का और प्रलेस की ओर से आयोजित होने वाले समानान्तर साहित्य उत्सव को अदीबों का साहित्य उत्सव बताया। प्रलेस के अध्यक्ष एवं फेस्टीवल चेयरमेन वरिष्ठ साहित्यकार ऋतुराज ने इस अवसर पर कहा कि जिस तरह लिट फेस्ट कल्चर अंग्रेजी का वर्चस्व स्थापित करने लगी है, इसमें उत्तर औपनिवेशिक संस्कृति की झलक दिखाई देती है। प्रलेस समानान्तर साहित्य उत्सव के माध्यम से हिंदी, उर्दू, पंजाबी, राजस्थानी और अन्य भारतीय भाषाओं में हो रहे विश्व स्तरीय लेखन को रेखांकित करने की पहल कर रहा है।

इप्टा के अध्यक्ष वरिष्ठ रंगकर्मी रणवीर सिंह पत्रकारों को समानान्तर साहित्य उत्सव की जानकारी देते हुए।

फेस्टीवल के संयोजक कृष्ण कल्पित ने बताया कि तीन दिवसीय इस उत्सव में कुल 24 सत्र आयोजित किये जाएंगे जिसमें कविता, कहानी, आलोचना, राजनीति, अर्थशास्त्र, किसान, दलित, आदिवासी-बहुजन आदि विषयों पर हिंदी, उर्दू, पंजाबी, राजस्थानी, सिंधी आदि भाषाओं में विस्तृत चर्चा होगी। उत्सव के दौरान हर शाम नाटक, कविता पाठ, संगीत और सिनेमा का आयोजन होगा। इस उत्सव में राजस्थान की लोककलाओं और लोक संगीत को भी पूरी तव्वजो दी जाएगी। उत्सव में राजस्थान के दूरदराज के इलाकों से करीब 100 से अधिक अतिथि लेखकों के अलावा राष्ट्रीय स्तर के अनेक अतिथि लेखक शिरकत करेंगे।

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