भारतीय भाषाओं के नामचीन हस्ताक्षर करेंगे ‘‘समानांतर साहित्य उत्सव’’ का उद्घाटन

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जयपुर। साहित्य के बाजारीकरण और लिट-फेस्ट-अपसंस्कृति के विरूद्ध भारतीय भाषाओं को समर्पित ’समानांतर साहित्य उत्सव’ का उद्घाटन भारतीय भाषाओं के नामचीन हस्ताक्षर हिन्दी के विख्यात कवि ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह, ’पहल’ के यशस्वी सम्पादक ज्ञानरजंन, विख्यात कवि विष्णु खरे, प्रख्यात कथाकार मैत्रेयी पुष्पा, सरस्वती सम्मान से समादृत पंजाबी के मशहूर कवि सुरजीत पातर और साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त राजस्थानी के कवि-नाट्यकार डाॅ. अर्जुन देव चारण 27 जनवरी को सुबह 10.30 बजे यूथ हाॅस्टल में निर्मित गुलेरी ग्राम के मुक्तिबोध मंच पर करेंगे। उद्घाटन समारोह में प्रगतिशील लेखक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष अली जावेद और महासचिव राजेन्द्र राजन भी मौजूद रहेंगे। उद्घाटन समारोह से पहले जयपुर का प्रसिद्ध कावा ब्रास बैण्ड अतिथियों का संगीतमय स्वागत करेगा।

त्रिदिवसीय साहित्य समारोह में विभिन्न विषयों पर 54 सत्र आयोजित किये जायेंगे

राजस्थान प्रगतिशील लेखक संघ (प्रलेस) के महासचिव एवं इस आयोजन के मुख्य समन्वयक ईशमधु तलवार ने बताया कि 27 से 29 जनवरी तक चलने वाले इस त्रिदिवसीय साहित्य समारोह में विभिन्न विषयों पर 54 सत्र आयोजित किये जायेंगे। यह सत्र मुक्तिबोध मंच, बिज्जी की बैठक, हरीश भादानी नुक्कड़ और गोडावण तथा कुरजां मंे चलेंगे। इस समारोह में देशभर से 50 लेखकों को आमंत्रित किया गया है। इसके साथ ही जयपुर के अलावा राजस्थान के दूर-दराज इलाकों से 100 से अधिक लेखक इस समारोह में शिरकत करेंगे। समारोह में स्त्री लेखन का सत्र विख्यात लेखिका प्रभा खेतान, न्यायाधीशों की आत्मकथाओं पर केन्द्रित सत्र न्यायमूर्ति के.एल.बापना, मीडिया सत्र के.एल. कोचर की स्मृति को समर्पित होंगे।

त्रिदिवसीय साहित्य समारोह में विभिन्न विषयों पर 54 सत्र आयोजित किये जायेंगे

समारोह के तीनों दिन मुक्तिबोध मंच पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। पहले दिन अमेरिका से आए दीपक कुमार के कबीर और मीरा के भजनों के गायन के साथ ही जयपुर के विख्यात गजल गायक अहमद मोहम्मद हुसैन का गायन होगा। शाम को दूसरे दिन कवि सम्मेलन-मुशायरा और तीसरे दिन प्रेमचन्द की कहानी ’कफन’ पर आधारित इप्टा की नाट्य प्रस्तुति होगी। साथ ही बिहार, झारखण्ड, मध्यप्रदेश से भी जन गीत गाने वालों की प्रस्तुतियां होगी। समानांतर साहित्य उत्सव सम्भवतः देश का पहला ऐसा साहित्य उत्सव होगा जो पूर्णतया लेखकों के परस्पर सहयोग और जन भागीदारी से किया जा रहा है।

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