हिन्दू से पहले सरहद पर, मुसलमान का सर होगा

– विख्यात कवि बंकट बिहारी ‘पागल’ की पुण्यतिथि पर आयोजित हुई काव्य गोष्ठी

जयपुर। देश के ख्यात कवि अब्दुल गफ्फार ने ‘अगर जंग का शंख बजा, उस समय यही मंजर होगा/हिन्दू से पहले सरहद पर, मुसलमान का सर होगा’, गीतकार निशांत मिश्रा ने ‘गलतियों से जुदा, तू भी नहीं, मैं भी नहीं/दोनों इंसान है, खुदा तू भी नहीं, मैं भी नहीं’, प्रशंसा श्रीवास्तव ने ‘अक्कड़ बक्कड़ बम्बे बो, गीत ये मिलकर गाते थे/पापा के एक पैसे पर तो, हम कितना इतराते थे’, संतोष चारण ने ‘तू कहाँ चली ऐ हवा, दिए से मुकाबला करने/तेरी ताकत दिये को बुझाने की है मिलाने की नहीं’ और कवयित्री प्रज्ञा श्रीवास्तव ने ‘पागल की कल्पना में विवेक की सौगात है/प्रज्ञा की परिभाषा प्रशंसा के साथ है’ जैसी मर्मस्पर्शी रचनाएं सुनाकर देश के विख्यात कवि बंकट बिहारी ‘पागल’ की पुण्यतिथि पर सदर्न हाईट्स, प्रताप नगर में आयोजित काव्य गोष्ठी में उन्हें अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
राष्ट्रीय कवि चौपाल की राजस्थान शाखा की ओर से आयोजित इस काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि कांग्रेस नेता राजकुमार शर्मा थे और अध्यक्षता कलमकार मंच के राष्ट्रीय संयोजक निशांत मिश्रा ने की। कवि अब्दुल गफ्फार और वरिष्ठ कवयित्री चन्द्रेश जैन (एटा) विशिष्ट अतिथि थे। इस अवसर पर प्रति वर्ष राष्ट्रीय स्तर पर कविता श्रेणी में दिया जाने वाला कलमकार पुरस्कार बंकट बिहारी ‘पागल’ के नाम से दिये जाने की घोषणा निशांत मिश्रा ने की।

कार्यक्रम संयोजिका प्रशंसा श्रीवास्तव ने बंकट बिहारी ‘पागल’ के कृतित्व और व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला। काव्य गोष्ठी में चन्द्रेश जैन (एटा) ने ‘व्योम के वितान सी अनन्त प्यास उर लिये/मैं खड़ी, मैं खड़ी अनन्त आस उर लिये’, रजनी श्री ने ‘बह न जाये अनमोल आँसू, इस डर से चुप रहती है’, डॉ. निशा माथुर ने ‘महके हूए गुलाबों पे, आ तेरी यादों के छन्द लिखूँ’, ज्ञानवती सक्सैना ‘ज्ञान’ ने उनकी याद सताती है जो चले गए/आँखे भर आती है क्यूँ चले गए’ के अलावा पी.के. मस्त, वीणा शर्मा ‘सागर’, वीनू शर्मा, सुनीता जबरदस्त, जयदीप, राजेश ‘रजुआ’, अमरीश सक्सैना, राजेन्द्र कुमार मिश्रा और बेबी वान्या श्रीवास्तव ने भी अपनी रचनाओं की प्रस्तुति देकर गोष्ठी को काव्यमय बना दिया।

संचालन संतोष चारण व भानू भारद्वाज ने किया। इस अवसर पर चेतन स्वरूप श्रीवास्तव, बी.डी. शर्मा, रितेश श्रीवास्तव, जय कुमार, राजीव श्रीवस्तव, वैशाली श्रीवास्तव, दिनकर दुरेजा, गिरधारी सहित बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी मौजूद थे।

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