बड़ा सवाल: देश, सेना और शहीदों के लिए क्यों नहीं दिखाते जुनून?

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जयपुर। इग्लैंड में आयोजित आईसीसी चैम्पियंस ट्राफी के फाइनल में रविवार को चिरप्रतिद्वंदी भारत-पाकिस्तान का मुकाबला है। इस मुकाबले को लेकर देश में मीडिया चैनल्स, सोशल मीडिया से लेकर आम जनता तक का जो समर्थन, उत्साह और जुनून भारतीय क्रिकेट टीम के लिए नजर आ रहा है, वैसा समर्थन, उत्साह और जुनून मीडिया चैनल्स, सोशल मीडिया और देश की जनता में हमारे देश, भारतीय सेना और शहीदों के प्रति नजर क्यों नहीं आता? यहां तक की राजनीतिक दल भी सेना की कार्रवाई को लेकर गाहेबगाहे टिप्पणी करने से बाज नहीं आते। जम्मू एवं कश्मीर में नियंत्रण रेखा पर निरन्तर हो रहे आतंकी हमलों और आतंकियों की घुसपैठ की कोशिशों को नाकाम करने में अपनी मुस्तैदी और अदम्य साहस का परिचय दे रहे भारतीय सैनिकों और आए दिन हो रही ऐसी घटनाओं में शहीद हो रहे हमारे वीर सैनिकों के लिए हमारी भावनाएं और श्रद्धा हिलोरें क्यों नहीं मारती? बहुत से ऐसे सवाल हमारे सामने मौजूद हैं, लेकिन हम इन सवालों से कन्नी काट रहे हैं।
जम्मू एवं कश्मीर के अनंतनाग में कुलगाम के अरवानी गांव में दो दिन पहले शुक्रवार को भारतीय सेना ने लश्कर कमांडर जुनैद मट्टू और उसके दो साथियों को मुठभेड़ में मार गिराया। चैनल्स पर पट्टी चल रही थी ‘सुरक्षाबलों ने लश्कर आतंकी मट्टू को घेरा’ देर शाम तक सभी चैनल्स सिर्फ पट्टी चला रहे थे। शाम को आतंकियों ने पुलिस वाहन पर हमला किया, जिसमें छह पुलिसकर्मी शहीद हुए, लेकिन यह भी किसी के लिए महत्वपूर्ण नहीं था। अधिकतर चैनल्स भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले फाइनल क्रिकेट मैच के महामुकाबले से पहले की कवरेज ऐसे दिखाने में जुटे दिखाई दिये कि क्रिकेट मैच नहीं, दोनों देशों के बीच युद्ध होने जा रहा हो।
यही हाल सोशल मीडिया पर नजर आता है। कोई लड़की अपना कुछ अलग अंदाज में फोटो डाल दे तो कमेंट्स और लाइक की बाढ़ आ जाती है, लेकिन भारतीय सेना की वीरता और अदम्य साहस का जिक्र हो या नियंत्रण रेखा और नक्सली इलाकों में सैनिकों के शहीद होने की खबर, ऐसा लगता है कि जैसे किसी ने सबको कुनैन की गोली खिला दी हो। सबको सांप सूंघ जाता है। अगुंली पर गिनने जितने लोग भी भारतीय सेना की कामयाबी, वीरता और अदम्य साहस का समर्थन करते दिखाई नहीं पड़ते। शहीद सैनिकों के प्रति भी उनकी भावनाएं और श्रद्धा सोई रहती हैं।
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान की शह पर आतंकवादी नियंत्रण रेखा पार कर घुसपैठ की कोशिश कर चुके हैं। अनेक मुठभेड़ भी हो चुकी हैं। भारतीय सेना ने आतंकियों के मंसूबों को बुरी तरह से नाकाम करने में हर बार सफलता हासिल की है। इसमें हमारे कई जाबांज सैनिक शहीद भी हो चुके हैं, लेकिन देष के राजनीतिक दलों, मीडिया चैनल्स, सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों को इससे काई सरोकार नहीं। राजनीतिक दल के नेता सिर्फ टिप्पणी या सहानुभूति के चार शब्द बोलकर पल्ला झाड़ लेते हैं, तो चैनल्स राजनीतिक दलों की उपलब्धियों को चमकाने का खेल शुरू कर देते हैं। रही सोशल मीडिया की बात तो वहां देश, सेना और शहीदों के लिए कोई जगह दिखाई ही नहीं पड़ती।
पाकिस्तान आतंकवाद का पनाहगार है यह बात जगजाहिर हो चुकी है। पाक सेना अपने नापाक इरादों के तहत आए दिन नियंत्रण रेखा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर रही है। जम्मू एवं कश्मीर में भारतीय सैनिक और स्थानीय पुलिस के जवान लगातार शहीद हो रहे हैं। आम नागरिक भी आतंकियों का निशाना बन रहे हैं, लेकिन राजनीतिक दल कभी मेजर गोगाई की पत्थरबाज को जीप से बांधकर घुमाने को लेकर बयानबाजी कर रहे हैं तो कभी सेना प्रमुख की तुलना सड़कछाप गुंडे से कर रहे हैं और चैनल्य इस पर बहस का आयोजन कर अपना कर्तव्य पूरा कर रहे हैं। आम जनता की भावनाएं और जुनून भी देश के राजनेताओं की बयानबाजी और चैनल्स पर परोसे जा रही व्यवसायिकता के चलते सुप्त हो चुके हैं।
अगर हमारे घर में आकर कोई हमें बार बार ललकारेगा, हमसे मारपीट करेगा, हमें नुकसान पहुंचाएगा, क्या तब हम खामोश रहेंगे? नहीं न। तो फिर, यह देश किसका है? यह भी तो हमारा घर, हमारी मातृभूमि है। फिर इस पर लगातार हो रहे हमलों पर हम खामोश क्यों हैं? क्रिकेट को लेकर इतना समर्थन, जोश और जुनून दिखा सकते हैं तो देश, सेना और शहीदों के लिए क्यों नहीं?
राजनीतिक दल सिर्फ मुद्दों को अपने अनुरूप बनाकर उनका राजनीतिक लाभ उठाते हैं। चैनल्स के लिए उनके व्यवसायिक हित पहले हैं। देश, सेना और शहीद बाद में, लेकिन आम जनता? आम जनता सो चुकी है या कहे कि उसको दो वक्त की रोटी और परिवार के अलावा किसी ओर मसले से कोई सरोकार नहीं। अगर देश की आम जनता एकजुट हो जाए और यह प्रण कर ले कि देश, सेना और शहीदों से पहले कुछ नहीं और जो राजनेता, राजनीतिक दल या फिर कोई भी क्यों न हो (मीडिया भी), इसे नजरअंदाज करेगा, उसको देशद्रोही की नजरों से देखा जाएगा। जिस दिन देश की जनता, राजनीतिक दल और मीडिया के लिए देश, भारतीय सेना और शहीद सर्वोपरि होंगे, उस दिन आतंकी तो क्या, उसके आका पाकिस्तान की भी मजाल नहीं कि वो सपने में भी भारत में नापाक हरकत करने की सोचे। जय हिन्द…

(लेखक पिंकसिटी प्रेस क्लब के पूर्व उपाध्यक्ष, वरिष्ठ पत्रकार एवं मीडिया चक्र के संपादक हैं)

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